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वृक्ष और वास्तु

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मानव का प्रकृति , वृक्षों और पौधों के साथ सदियों से अटूट रिश्ता रहा है। वृक्ष , मानव जीवन का आधार है। केवल बढ़ते हुए प्रदूषण को रोकने में ही नहीं , बल्कि जलवायु एवं वातावरण के संतुलन में भी वृक्षों का योगदान सर्वोपरि है। वृक्षों से हमें फल , फूल , औषधि और लकड़ी आदि तो मिलता ही है , साथ ही घर और अपने आसपास पेड़ - पौधे लगाना मनुष्य का धर्म है। बागवानी का गृह - विन्यास और नगर - विन्यास से अटूट नाता है। हमारे ऋषि - मुनियों द्वारा इससे संबंधित व्याख्या ज्योतिष और वास्तु संबंधी ग्रंथों में विस्तार से की गई है।ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार , हमारे सौरमंडल के विभिन्न ग्रहों का अलग - अलग प्रकार के वृक्षों पर आधिपत्य है। जो वृक्ष ऊंचे और मज़बूत तथा कठोर तने वाले ( शीशम इत्यादि ) हैं , उनपर सूर्य का विशेष अधिकार होता है। दूध वाले वृक्षों ( देवदार इत्यादि ) पर चंद्र का प्रभाव होता है। लता , वल्ली इत्यादि पर चंद्र और शुक्र का अधिकार होता है। झाड़ियों वाले पौधों ...